सावन का महीना – भगवान शिव की पूजा और भक्ति का खास समय
खास बात – रुद्राक्ष पहनने से शिव जी की कृपा मिलती है
सावन में रुद्राक्ष क्यों पहनें?
सावन में शिव जी की पूजा के साथ-साथ रुद्राक्ष पहनना बहुत शुभ माना जाता है।
शिव पूजा में बिल्व पत्र, धतूरा, आंकड़े के फूल, अष्टगंध, अबीर-गुलाल और रुद्राक्ष अर्पित किए जाते हैं।
पूजा के बाद रुद्राक्ष धारण करने की परंपरा है।
रुद्राक्ष की उत्पत्ति की कहानी
- शिव पुराण के अनुसार, रुद्राक्ष भगवान शिव के आंसुओं से बना है।
- कथा है कि शिव जी ने वर्षों तक आंखें बंद करके तपस्या की।
- जब उन्होंने आंखें खोलीं, तो आंसुओं की बूंदें जमीन पर गिरीं।
- इन जगहों पर पेड़ उग आए और इन्हें रुद्राक्ष वृक्ष कहा गया।
- “रुद्र” मतलब शिव और “अक्ष” मतलब आंख।
रुद्राक्ष का धार्मिक महत्व
- इसे पवित्र और दिव्य माना जाता है।
- सावन में रुद्राभिषेक के समय रुद्राक्ष का प्रयोग शुभ होता है।
- रुद्राक्ष पहनने से मन शांत रहता है और नकारात्मकता दूर होती है।
रुद्राक्ष के प्रकार
- रुद्राक्ष पर धारियां होती हैं, जिनसे इसका प्रकार पता चलता है।
- सबसे आम – पंचमुखी रुद्राक्ष → मानसिक संतुलन देता है, तनाव कम करता है।
- बाज़ार में 1 मुखी से 14 मुखी तक के रुद्राक्ष मिलते हैं।
रुद्राक्ष पहनते समय ध्यान रखें
- अधार्मिक काम न करें
- मासाहारी खाना न खाये और नशा न करें
- माता पिता और अपने बड़ों का सम्मान करें
- टूटे फूटे, खराब या कीड़े लगे रुद्राक्ष न पहनें
आकार के आधार पर रुद्राक्ष के प्रकार
- आंवले के बराबर – सबसे उत्तम
- बेर के बराबर – मध्यम फल देने वाला
- चना जितना – कम फल देने वाला
कैसे रुद्राक्ष न पहनें
- टूटा हुआ, गोल न होने वाला, बिना उभार का रुद्राक्ष
- खराब या सड़ा हुआ रुद्राक्ष
रुद्राक्ष धारण करने का सही तरीका
- शुद्धिकरण – गंगाजल या साफ पानी से धोएं
- पंचामृत स्नान – दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल से स्नान कराएं
- मंत्र जप – “ॐ नमः शिवाय” का जप करते रहें
- धारण – लाल, काले या सफेद धागे में पिरोकर गले या दाहिने हाथ में पहनें
मान्यता – रुद्राक्ष पहनने वाले व्यक्ति को यज्ञ, तप, तीर्थ और दान जैसे पुण्य फल पाता है।
निष्कर्ष
सावन में रुद्राक्ष धारण करना बहुत शुभ माना जाता है। सही तरीके से पहनने पर यह आपको मानसिक शांति, शुभ फल और भगवान शिव की कृपा दिलाता है।