सावन महीना – 9 अगस्त 2025 तक हैं
खास बात – शिव जी ने भी कई बार अवतार लेकर दुनिया की रक्षा की
शिव जी ने भी लिए कई अवतार
जिस तरह भगवान विष्णु ने अलग अलग समय पर अवतार लिए, वैसे ही शिव जी ने भी 19 अवतार लिए हैं। सावन में इन कथाओं को पढ़ना और सुनना बहुत शुभ माना जाता है। यहाँ हम 10 प्रमुख अवतारों के बारे में जानेंगे और समझेंगे
शरभ अवतार – नृसिंह का क्रोध शांत किया
जब भगवान विष्णु नृसिंह रूप में आए और हिरण्यकश्यपु का वध किया, तबसे उनका क्रोध शांत नहीं हो रहा था। सृष्टि असंतुलित होने लग गयी थी।तब शिव जी शरभ रूप में प्रकट हुए – आधा शेर जैसा, आधा पक्षी जैसा रूप। उन्होंने नृसिंह को अपनी पूंछ में लपेटा और आसमान में ले गए। उसके बाद जाकर नृसिंह शांत हुए।
पिप्पलाद मुनि – शनिदेव को दिया शाप
पिप्पलाद मुनि, शिव जी का अवतार माने जाते हैं। बचपन में उन्हें पता चला कि उनके पिता को शनि के प्रभाव से कष्ट हुआ था। तब उन्होंने शनिदेव को आकाश से गिरा दिया और शाप दिया था कि वे 16 साल तक किसी को कष्ट नहीं देंगे। बाद में मुनि ने उन्हें क्षमा किया।
नंदी अवतार – शिव के प्रिय गणाध्यक्ष
शिलाद मुनि ने शिव जी की तपस्या की और पुत्र रूप में शिव जी ने जन्म लिया – नंदी।
नंदी बड़े होकर शिव जी के सबसे प्रिय सेवक बने और उनके सबसे करीब बने।
भैरव अवतार – ब्रह्मा का अभिमान तोड़ा
एक बार ब्रह्मा जी और विष्णु जी में श्रेष्ठता को लेकर विवाद हुआ। तब शिव जी भैरव रूप में आए और ब्रह्मा जी का पाँचवां सिर काट डाला। बाद में काशी में उन्हें जाकर ब्रह्महत्या के दोष से मुक्ति मिली।
अश्वत्थामा – महाभारत का अमर योद्धा
द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा को शिव जी का अंश माना जाता है। महाभारत में ब्रह्मास्त्र चलाने के बाद उन्होंने अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ पर भी हमला किया, लेकिन कृष्ण जी ने बच्चे की रक्षा की। अश्वत्थामा को कलियुग के अंत तक भटकने का शाप मिला हुआ हैं।
वीरभद्र – शिव का क्रोध
देवी सती के आत्मदाह के बाद, शिव जी के क्रोध से वीरभद्र उत्पन्न हुए। उन्होंने दक्ष का सिर काट दिया। बाद में शिव जी ने बकरे का सिर लगाकर दक्ष को जीवित करा ।
दुर्वासा मुनि – क्रोध के प्रतीक
महर्षि अत्रि और माता अनुसूइया के घर शिव जी के अंश से जन्मे दुर्वासा मुनि अपने तेज और क्रोध के लिए प्रसिद्ध हुए।
हनुमान – अजर अमर भक्त
हनुमान जी शिव जी का अंशावतार माने जाते हैं। वे हमेशा जवान और अमर रहेंगे। वे बल, भक्ति और सेवा के प्रतीक माने जाते हैं।
किरात अवतार – अर्जुन की परीक्षा
महाभारत में अर्जुन तप कर रहे थे। एक जंगली शिकारी (किरात रूप में शिव जी) आए और अर्जुन से युद्ध किया। अर्जुन की वीरता से प्रसन्न होने के बाद शिव जी ने उन्हें दिव्य अस्त्र दिया।
अर्धनारीश्वर – शिव और शक्ति का संयुक्त रूप
शिव जी आधा पुरुष और आधा स्त्री (पार्वती जी) के रूप में प्रकट हुए, जिसे अर्धनारीश्वर कहा जाता है। यह रूप सृष्टि के संतुलन और जीवन की शुरुआत का प्रतीक माना गया है।
निष्कर्ष
सावन में शिव जी के इन अद्भुत अवतारों की कथाएं पढ़ने और सुनने से भक्ति बढ़ती है और जीवन में सकारात्मकता बढ़ती है।