ऋषि पंचमी 2025 में कब? तमाम दोषों से मुक्ति पाने का पवित्र दिन

📅 तारीख और मुहूर्त (Rishi Panchami 2025 Date & Muhurat)

  • तारीख – 31 अगस्त 2025, रविवार
  • पंचमी तिथि प्रारंभ – 30 अगस्त 2025, रात 11:45 बजे
  • पंचमी तिथि समाप्त – 31 अगस्त 2025, रात 09:10 बजे
  • पूजा का शुभ मुहूर्त – प्रातःकाल से दोपहर 01:30 बजे तक सबसे उत्तम

🪔 ऋषि पंचमी क्यों मनाया जाता है?

हिन्दू धर्म में ऋषि पंचमी का खास महत्व है। यह दिन सप्तऋषियों (कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वशिष्ठ) की पूजा के लिए समर्पित है।
मान्यता है कि यह व्रत विशेष रूप से महिलाओं के लिए पापों और अशुद्धियों से मुक्ति का साधन है।

  • रजस्वला दोष से मुक्ति – शास्त्रों के अनुसार, माहवारी के दौरान अनजाने में हुए नियम भंग के दोष को दूर करने के लिए यह व्रत किया जाता है।
  • पाप शुद्धि का अवसर – वर्तमान और पूर्व जन्म के पापों के प्रायश्चित हेतु भी यह दिन श्रेष्ठ माना गया है।
  • आध्यात्मिक उत्थान – ऋषि पंचमी व्रत आत्मा को पवित्र कर मोक्ष के मार्ग में सहायक होता है।

🌟 सप्तऋषियों का पूजन क्यों होता है?

सप्तऋषि वे महान ऋषि हैं जिन्होंने वेद, उपनिषद और अन्य धर्मग्रंथों के ज्ञान से समाज को दिशा दी।

  • ज्ञान और धर्म के प्रतीक – उन्होंने संयम, तप, सत्य और सेवा की राह दिखाई।
  • सृष्टि के रक्षक – अपनी साधना से उन्होंने धर्म को स्थिर और जीवित रखा।
  • पाप नाशक – सप्तऋषि पूजन से दोषों का नाश और जीवन में शुद्धि आती है।
  • परिवार की समृद्धि – मान्यता है कि इनके आशीर्वाद से घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

🛕 ऋषि पंचमी व्रत विधि (Puja Vidhi)

  1. प्रातःकाल स्नान के बाद स्वच्छ पीले या लाल वस्त्र धारण करें।
  2. व्रत का संकल्प लें।
  3. सप्तऋषियों की प्रतिमा या चित्र को कलश के ऊपर स्थापित करें।
  4. अक्षत, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य और पान का अर्पण करें।
  5. ऋषि पंचमी व्रत कथा का श्रवण करें।
  6. गुड़, दही, चना आदि का प्रसाद बांटें और स्वयं ग्रहण करें।

🌼 व्रत के लाभ (Benefits of Rishi Panchami Vrat)

  • पाप और दोषों से मुक्ति
  • मानसिक शांति और आत्मिक शुद्धि
  • परिवार में सुख-समृद्धि
  • आध्यात्मिक प्रगति
  • मोक्ष की प्राप्ति

📌 निष्कर्ष

ऋषि पंचमी 2025 केवल एक धार्मिक तिथि नहीं, बल्कि यह जीवन को पवित्र और संतुलित बनाने का अवसर है। इस दिन व्रत, पूजा और कथा के माध्यम से हम सप्तऋषियों के आदर्शों को अपनाकर अपने जीवन को ज्ञान, तप और सदाचार की दिशा में आगे बढ़ा सकते हैं।

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