रक्षा बंधन की शुरुआत कैसे हुई? जानिए राजा बलि और माता लक्ष्मी से जुड़ी पौराणिक कथा

रक्षा बंधन सिर्फ एक त्यौहार नहीं, बल्कि भाई-बहन के अटूट प्रेम, सुरक्षा और विश्वास का प्रतीक है। हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह पर्व भारत की परंपराओं में गहराई से रचा-बसा हुआ है। अक्सर हम रक्षाबंधन को लेकर कृष्ण-द्रौपदी, यम-यमी या रानी कर्णावती और हुमायूं की कहानियाँ सुनते हैं, लेकिन एक बहुत ही पवित्र और अद्भुत कथा राजा बलि और माता लक्ष्मी से भी जुड़ी हुई है, जो रक्षाबंधन के मूल स्वरूप को दर्शाती है।

🕉️ पौराणिक कथा: राजा बलि और माता लक्ष्मी की कहानी

प्राचीन काल में एक अत्यंत पराक्रमी और दानी राजा हुए – राजा बलि। वे असुर कुल में जन्मे थे, लेकिन फिर भी अपने धर्म, दानशीलता और सत्य पर अडिग रहने के कारण सभी देवताओं और ऋषियों के सम्मान के पात्र थे।

🔱 राजा बलि और वामन अवतार

राजा बलि ने अपने यज्ञों और तपस्या के बल पर तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया था। तब देवताओं की रक्षा और अधर्म को रोकने के लिए भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया — एक बौने ब्राह्मण के रूप में।
वामन जी राजा बलि के यज्ञ में पहुँचे और दान में तीन पग भूमि माँगी। बलि ने मुस्कराकर हामी भर दी। तभी वामन भगवान ने विराट रूप धारण कर लिया और एक पग में पृथ्वी, दूसरे में स्वर्गलोक नाप लिया। तीसरे पग के लिए जब कोई स्थान न बचा, तो राजा बलि ने अपना मस्तक आगे कर दिया।

भगवान विष्णु बलि की भक्ति और समर्पण से प्रसन्न हुए और उन्हें पाताल लोक का राजा बना दिया, साथ ही वचन दिया कि वे स्वयं बलि के पास पाताल लोक में निवास करेंगे।

🌺 माता लक्ष्मी की युक्ति

भगवान विष्णु जब राजा बलि के वचन के कारण पाताल लोक चले गए, तो माता लक्ष्मी बहुत व्याकुल हो गईं। उन्हें अपने पति की चिंता सताने लगी।

👑 माता लक्ष्मी बनी ब्राह्मणी

तब नारद मुनि के सुझाव पर माता लक्ष्मी एक ब्राह्मण महिला का रूप धारण करके राजा बलि के पास पहुँचीं। उन्होंने राजा बलि से आश्रय माँगा और रक्षा सूत्र (राखी) बाँधते हुए कहा,
आज से आप मेरे भाई हुए।”

राजा बलि ने भी भावुक होकर उन्हें अपनी बहन स्वीकार कर लिया और वचन दिया कि वे उनकी हर प्रकार से रक्षा करेंगे।

🙏 माँ लक्ष्मी का वरदान

तब लक्ष्मीजी ने अपने असली रूप का परिचय दिया और राजा बलि से भगवान विष्णु को वापस भेजने का अनुरोध किया। राजा बलि ने हँसते हुए कहा:
भगवान मेरे मेहमान थे, लेकिन अब वे आपके हैं। आप मेरी बहन हैं, तो मेरा घर भी आपका है। भगवान विष्णु जहाँ चाहें निवास करें।”

राजा बलि की इस त्याग और प्रेम भावना से प्रसन्न होकर माता लक्ष्मी ने उन्हें समृद्धि, दीर्घायु और विजय का आशीर्वाद दिया।

🌸 रक्षाबंधन का महत्व इस कथा से

इस कथा से यह स्पष्ट होता है कि रक्षाबंधन केवल खून के रिश्तों का नहीं, बल्कि भावनात्मक और धार्मिक संबंधों का भी उत्सव है। एक रक्षासूत्र ने एक देवी और एक दैत्यराज के बीच भाई-बहन का रिश्ता जोड़ दिया, जिसमें त्याग, प्रेम और समर्पण की भावना सर्वोपरि थी।

🪔 निष्कर्ष

राजा बलि और माता लक्ष्मी की कथा न केवल रक्षाबंधन की शुरुआत की पौराणिक व्याख्या देती है, बल्कि यह भी सिखाती है कि रक्षा बंधन का पर्व प्रेम, निष्ठा और समर्पण का प्रतीक है। चाहे बहन-भाई का संबंध खून का हो या आत्मा का – राखी एक ऐसा धागा है जो दिलों को जोड़ता है और जीवन भर निभाया जाता है।

📚 जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य:

विषय जानकारी
पर्व रक्षाबंधन (Raksha Bandhan)
तिथि श्रावण मास की पूर्णिमा
पौराणिक कथा राजा बलि और माता लक्ष्मी
मूल संदेश रक्षा, प्रेम, समर्पण और विश्वास

 

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