हरतालिका तीज भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। यह व्रत मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी आयु और दांपत्य जीवन की सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है। कुंवारी कन्याएं भी यह व्रत मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सबसे पहले माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए इस व्रत का पालन किया था। तभी से यह व्रत अखंड सौभाग्य और मंगल कामनाओं का प्रतीक माना जाता है।
हरतालिका तीज व्रत विधि (Hartalika Teej Vrat Vidhi)
- यह व्रत निर्जला रखा जाता है, यानी इस दिन अन्न और जल का सेवन वर्जित है।
- प्रदोष काल में महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की रेत या बालू से बनी प्रतिमाओं की विधि-विधान से पूजा करती हैं।
- पूजा में सुहाग की पिटारी (सिंदूर, चूड़ी, बिंदी, बिछिया आदि) माता पार्वती को अर्पित की जाती है।
- भगवान शिव को धोती और अंगोछा अर्पित करने का विधान है।
- पूजा के बाद सुहाग सामग्री को सास के चरण स्पर्श करके किसी ब्राह्मण या ब्राह्मणी को दान दिया जाता है।
- पूजा में प्रसाद के रूप में फल, खीर और हलवा का भोग लगाया जाता है।
- इस व्रत में रात्रि जागरण करना बेहद शुभ माना जाता है।
- अगले दिन सूर्योदय के बाद व्रत का पारण किया जाता है। पारण से पहले महिलाएं शिव-पार्वती की पूजा करती हैं और माता पार्वती को सिंदूर अर्पित करके वही सिंदूर अपनी मांग में भरती हैं।
हरतालिका तीज व्रत नियम (Hartalika Teej Vrat Niyam)
- यह व्रत सूर्योदय से लेकर अगले दिन सूर्योदय तक किया जाता है।
- व्रत निर्जला होता है, यानी इसमें अन्न और जल का सेवन नहीं किया जाता।
- एक बार व्रत शुरू करने पर इसे अधूरा नहीं छोड़ा जा सकता।
- इस व्रत में रात्रि जागरण का विशेष महत्व है।
- यह व्रत केवल विवाहित स्त्रियां ही नहीं बल्कि कुंवारी कन्याएं और विधवा महिलाएं भी रख सकती हैं।
- पूजा में शिव-पार्वती की मिट्टी या बालू से बनी प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं।
- माता पार्वती को सुहाग सामग्री अर्पित करना अनिवार्य है, जिसे अगले दिन दान में दे दिया जाता है।
- सुबह और शाम दोनों समय पूजा होती है, लेकिन शाम की पूजा अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है।
- पीरियड्स में भी इस व्रत को छोड़ा नहीं जाता, ऐसी स्थिति में कोई और व्यक्ति पूजा करा सकता है।
- गर्भवती और बीमार महिलाएं निर्जला व्रत न रखें, वे फलाहार कर सकती हैं।
- पूजा में बनाई गई शिव-पार्वती की प्रतिमाओं का अगले दिन विसर्जन कर देना चाहिए।
हरतालिका तीज में पानी पी सकते हैं?
सामान्यतः इस व्रत में पानी पीना मना है। लेकिन जिन महिलाओं के लिए निर्जला व्रत रखना कठिन हो, वे शाम की पूजा के बाद पानी ग्रहण कर सकती हैं।
क्या फलाहार कर सकते हैं?
यह व्रत निर्जला होता है, इसलिए अन्न और फलाहार दोनों वर्जित हैं। हां, यदि स्वास्थ्य संबंधी समस्या है तो डॉक्टर की सलाह से फलाहार लिया जा सकता है।
क्या चाय-कॉफी पी सकते हैं?
हरतालिका तीज में चाय और कॉफी पूरी तरह निषिद्ध है। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में महिलाएं शाम की पूजा के बाद पानी या चाय-कॉफी ले लेती हैं।
क्या दिन में सो सकते हैं?
इस व्रत में ही नहीं बल्कि किसी भी व्रत में दिन में सोने की मनाही है। मान्यता है कि ऐसा करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।
व्रत खोलने का सही समय
शास्त्रों के अनुसार, हरतालिका तीज का व्रत अगले दिन सूर्योदय के बाद खोला जाता है। लेकिन कई परंपराओं में महिलाएं शाम की पूजा के बाद व्रत का पारण भी कर लेती हैं।
निष्कर्ष
हरतालिका तीज का व्रत अखंड सौभाग्य और पति की लंबी आयु के लिए किया जाने वाला पावन व्रत है। इस दिन महिलाएं पूरे मन, श्रद्धा और आस्था के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं। नियमों का पालन करते हुए यदि यह व्रत किया जाए तो जीवन में वैवाहिक सुख-शांति, समृद्धि और दांपत्य जीवन में प्रेम सदैव बना रहता है।