हनुमान चालीसा – कब और किसने लिखी? जानें इसकी कहानी और खास बातें

हिंदू धर्म में हर दिन किसी न किसी भगवान या देवता को समर्पित होता है।
मंगलवार का दिन भगवान हनुमान जी को समर्पित है। इस दिन लोग हनुमान जी की पूजा और व्रत करते हैं ताकि जीवन के दुख दूर हों।

हनुमान जी के भक्त मानते हैं कि उनकी पूजा हनुमान चालीसा के बिना अधूरी है।
जो भक्त श्रद्धा से हनुमान चालीसा पढ़ते हैं, उन्हें सफलता और शुभ फल मिलते हैं।
अब जानिए – हनुमान चालीसा किसने और कब लिखी?

हनुमान चालीसा किसने लिखी थी?

शास्त्रों के अनुसार, भगवान श्रीराम और हनुमान जी एक दूसरे के पूरक हैं।
जहां राम कथा होती है, वहां हनुमान जी जरूर आते हैं।

कहानी के अनुसार, एक बार गोस्वामी तुलसीदास जी राम कथा सुना रहे थे।
इसी दौरान उनकी मुलाकात एक खास व्यक्ति से हुई।
तुलसीदास जी ने तुरंत समझ लिया कि यह साधारण इंसान नहीं, बल्कि यह कोई अदृश्य शक्ति है।

उस व्यक्ति ने तुलसीदास जी को एक जगह बताई, जहां उनकी मुलाकात हनुमान जी से हो सकती थी।

तुलसीदास जी की हनुमान जी से मुलाकात

कुछ समय बाद, तुलसीदास जी उनकी बताए गए स्थान पर पहुंचे।
वहां उनकी मुलाकात हनुमान जी से हुई।
हनुमान जी को देखकर तुलसीदास जी भाव विभोर हो गए और भगवान श्रीराम से मिलने की इच्छा जताई।

हनुमान जी ने उन्हें चित्रकूट जाने के लिए कहा, जहां श्रीराम उन्हें दर्शन देंगे।

हनुमान चालीसा की रचना

भगवान राम से मिलने की राह में, तुलसीदास जी ने हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए हनुमान चालीसा लिखी।
हनुमान जी उनकी भक्ति से बेहद प्रसन्न हुए।

और माना जाता है कि भक्ति आंदोलन के समय, तुलसीदास जी ने हनुमान चालीसा की रचना की थी।
यह चालीसा दोहों और चौपाइयों के रूप में लिखी गई है और इसमें हनुमान जी की महिमा का सुंदर वर्णन है।

हनुमान चालीसा पढ़ने के लाभ

  • दुख,  नकारात्मक ऊर्जा और बाधाएं दूर होती हैं।
  • साहस और आत्मविश्वास बढ़ता है।
  • सभी कामों में सफलता मिलती है।
  • जीवन में शांति और सुख बना रहता है और सभी तरह की परेशानिया दूर हो जाती है।

 नतीजा

हनुमान चालीसा सिर्फ एक भजन नहीं, बल्कि भक्ति और विश्वास का प्रतीक भी है।
तुलसीदास जी ने इसे प्रेम और श्रद्धा से लिखा था, और आज भी यह करोड़ों लोगों के जीवन का हिस्सा है।

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