इस दिन नहीं खाते हल से जुते खेत का अनाज, जानिए क्यों!
हलषष्ठी व्रत इस बार कब है?
हलषष्ठी व्रत इस बार 14 अगस्त 2025 को मनाया जाएगा। इस दिन माताएं और नवविवाहित महिलाएं अपने बच्चों की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाली के लिए यह व्रत रखती हैं।
क्यों मनाते हैं हलषष्ठी का व्रत?
यह व्रत भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम जी के जन्म की खुशी में मनाया जाता है। बलराम जी का मुख्य शस्त्र हल था, इसलिए इस दिन को हलषष्ठी कहा जाता है। यह व्रत भादो महीने की कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को आता है।
इस दिन हमें क्या नहीं करना चाहिए?
इस दिन माताएं और बहनें हल से जोती गई ज़मीन पर नहीं जातीं, यानी खेत में काम नहीं करतीं।
वे ऐसे खेतों का अनाज भी नहीं खातीं, जो हल से जोते गए हों।
इस दिन किसी भी तरह का खेती का काम नहीं किया जाता इसका मतलब यह है की आप को हल से होने वाले काम और हल से बनी हुई कोई भी चीज़ का इस्तेमाल नहीं होता।
यह परंपरा बताती है कि इस दिन धरती माँ को भी आराम दिया जाता है।
कैसा होता है व्रत?
महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं, यानी दिनभर पानी भी नहीं पीतीं।
वे भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं ताकि उनकी मनोकामना पूरी हो सके।
गांवों में तालाब बनाकर चौक चौराहों पर सजावट होती है और सामूहिक पूजा की जाती है।
क्या चढ़ता है भोग में?
इस दिन ‘छह’ (6) संख्या का बहुत खास महत्व होता है।
6 तरह की सब्जियां बनती हैं।
6 प्रकार के भौंरे बाटी और 6 तरह के भोग तैयार किए जाते हैं।
महिलाएं लाई, चना और गेहूं को भूनकर भगवान को भोग लगाती हैं।
कैसे मनाते हैं गांवों में?
गांवों में इस व्रत को बहुत उत्साह और श्रद्धा से मनाया जाता है।
महिलाएं पारंपरिक गीत गाती हैं, कथा सुनती हैं और पूजा करती हैं।
बच्चे भी इस दिन खास पकवानों का आनंद लेते हैं और नई बातें सीखते हैं।
क्या मिलता है इस व्रत से?
ऐसा माना जाता है कि हलषष्ठी व्रत करने से:
- संतान को लंबी उम्र मिलती है।
- घर में खुशहाली आती है।
- महिलाओं को संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है।
शुभकामनाएं:
आप भी इस पवित्र दिन पर अपने परिवार के साथ व्रत करें और भगवान का आशीर्वाद पाएं।
हलषष्ठी की हार्दिक शुभकामनाएं!