गणेश चतुर्थी और वास्तु नियम

गणेश चतुर्थी का त्योहार हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। इस दिन लोग घर में गणपति बप्पा की प्रतिमा लाते हैं और पूरे विधि विधान से पूजा करते हैं।
अगर इस पूजा में वास्तु नियमों का पालन किया जाए तो घर में सुख समृद्धि बढ़ती है और जीवन की परेशानियां दूर हो जाती हैं। आइए आसान भाषा में जानते हैं ये कुछ खास नियम।

भगवान गणेश की चौकी का नियम

  • गणेश जी की मूर्ति हमेशा लकड़ी की चौकी पर स्थापित करनी चाहिए शुभ माना जाता है।
  • चौकी घर के उत्तर पूर्व कोने (ईशान कोण) में रखनी चाहिए।
  • चौकी को फूल, केले के पत्ते और रंगीन सजावट से सजाएं ताकि गणपति जी की स्थापना में कोई कमी नहीं रेहनी चाहिए।
    ऐसा करने से घर में सुख, खुशियां और समृद्धि आती है।

मुख्य द्वार से जुड़े वास्तु नियम

  • मुख्य दरवाजा घर में ऊर्जा का रास्ता होता है।
  • गणेश चतुर्थी पर दरवाजे पर आम के पत्तों का तोरण (बंदनवार) लगाना शुभ होता है।
  • दरवाजे पर स्वास्तिक का चिन्ह बनाना चाहिए।
  • दरवाजे के पास रंगोली बनाना भी बहुत शुभ माना जाता है।
    इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है और बप्पा आपके जीवन से हर बाधा हटा देते हैं।

रंगों का खास महत्व

त्योहार पर घर सजाते समय सही रंगों का प्रयोग करना जरूरी है।

  • इस दिन लाल, गुलाबी, पीला और हरा रंग शुभ माना जाता है।
  • ये रंग घर में शांति और सकारात्मकता लाते हैं।
  • ध्यान रखें कि काला, भूरा और गहरा नीला रंग इस्तेमाल न करें।
    सही रंगों से घर का वातावरण पवित्र और शुभ बनता है।

निष्कर्ष

गणेश चतुर्थी पर अगर हम पूजा के साथ साथ इन छोटे छोटे वास्तु नियमों का पालन करें, तो भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं।

  • चौकी उत्तर-पूर्व दिशा में रखें।
  • दरवाजे को तोरण, स्वास्तिक और रंगोली से सजाएं।
  • घर में शुभ रंगों का उपयोग करें जिससे आपकी खुशियों में भी रंग भर आये।

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