हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। यह व्रत न केवल आत्मा को शुद्ध करता है, बल्कि इंसान को सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर परमात्मा के सान्निध्य की ओर ले जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि जो व्यक्ति श्रद्धा भाव से एकादशी का उपवास करता है, उसे मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है।
व्रत रखने की यह परंपरा भगवान विष्णु से जुड़ी हुई है। धार्मिक मान्यता है कि एकादशी देवी, भगवान विष्णु के शरीर से प्रकट हुई थीं। इसलिए प्रत्येक एकादशी को भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। एक माह में दो बार एकादशी आती है – एक शुक्ल पक्ष में और दूसरी कृष्ण पक्ष में।
सितंबर 2025 में दो महत्वपूर्ण एकादशी व्रत पड़ रहे हैं – परिवर्तिनी एकादशी (3 सितंबर) और इंदिरा एकादशी (17 सितंबर)। आइए जानते हैं इनके तिथि, मुहूर्त और महत्व विस्तार से।
🪔 सितंबर 2025 में एकादशी व्रत की तिथियां
- परिवर्तिनी एकादशी – 3 सितंबर 2025 (भाद्रपद शुक्ल एकादशी)
- इंदिरा एकादशी – 17 सितंबर 2025 (अश्विन कृष्ण एकादशी, पितृपक्ष)
🌙 परिवर्तिनी एकादशी 2025
परिवर्तिनी एकादशी को जलझूलनी ग्यारस और पद्मा एकादशी भी कहा जाता है। चातुर्मास के दौरान जब भगवान विष्णु शयन में रहते हैं, तो इस दिन वे करवट बदलते हैं, इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है।
तिथि और मुहूर्त
- तिथि प्रारंभ – 3 सितंबर 2025, सुबह 3:53 बजे
- तिथि समाप्त – 4 सितंबर 2025, सुबह 4:21 बजे
- पूजा का शुभ मुहूर्त – सुबह 6:00 बजे से 9:10 बजे तक
- व्रत पारण समय – 4 सितंबर को दोपहर 1:36 बजे से शाम 4:07 बजे तक
महत्व
- इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से धन–धान्य में वृद्धि होती है।
- घर में चल रहे आर्थिक कष्ट दूर होते हैं।
- परिवार में सुख-शांति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
🌙 इंदिरा एकादशी 2025
इंदिरा एकादशी का महत्व अन्य सभी एकादशियों से अलग है, क्योंकि यह पितृ पक्ष में आती है। इसे पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए सबसे उत्तम व्रत माना गया है।
तिथि और मुहूर्त
- तिथि प्रारंभ – 17 सितंबर 2025, सुबह 12:21 बजे
- तिथि समाप्त – 17 सितंबर 2025, रात 11:39 बजे
- पूजा का शुभ मुहूर्त – सुबह 6:07 बजे से 9:11 बजे तक
- व्रत पारण समय – 18 सितंबर को सुबह 6:07 बजे से 8:34 बजे तक
महत्व
- इस दिन का व्रत करने से पितरों को यमलोक से मुक्ति मिलती है।
- पितृ आत्माएं विष्णु लोक (वैकुंठ धाम) को प्राप्त होती हैं।
- ऐसा माना जाता है कि इंदिरा एकादशी के व्रत से सात पीढ़ियों के पापों का नाश हो जाता है।
🕉️ एकादशी व्रत करने का लाभ
- सभी पापों का नाश होता है।
- मृत्यु के समय आत्मा को कष्ट नहीं झेलना पड़ता।
- परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।
- पितरों की आत्मा को तृप्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
- व्रत करने वाला व्यक्ति मृत्यु के बाद वैकुंठ लोक को प्राप्त करता है।
✅ निष्कर्ष
सितंबर 2025 में आने वाली परिवर्तिनी एकादशी (3 सितंबर) और इंदिरा एकादशी (17 सितंबर), दोनों ही व्रत अत्यंत पवित्र और फलदायी माने गए हैं।
जहाँ परिवर्तिनी एकादशी से घर-परिवार में धन और समृद्धि आती है, वहीं इंदिरा एकादशी पितरों को मोक्ष दिलाने वाली मानी जाती है।
👉 इन दोनों ही एकादशियों का व्रत पूरी श्रद्धा और नियम से करने पर व्यक्ति को अपार पुण्य प्राप्त होता है और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।