साल 2025 खगोल विज्ञान और ज्योतिष दोनों ही दृष्टिकोण से बेहद खास रहने वाला है, क्योंकि इस वर्ष कुल चार ग्रहण लगेंगे—दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण। मार्च में साल का पहला चंद्र ग्रहण देखने के बाद अब 7 सितंबर 2025 को दूसरा चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है, जो भारत सहित दुनिया के कई हिस्सों में दिखाई देगा।
खास बात यह है कि यह चंद्र ग्रहण पितृ पक्ष की शुरुआत के दिन पड़ रहा है, जिससे इसका धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व और भी बढ़ जाता है। आइए विस्तार से जानते हैं इस ग्रहण से जुड़ी पूरी जानकारी—
भारत में दिखेगा पूर्ण चंद्र ग्रहण
ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास के अनुसार, यह ग्रहण भाद्रपद मास की शुक्ल पूर्णिमा के दिन रात 21:57 बजे शुरू होगा और 1:27 बजे समाप्त होगा। इस दौरान चंद्रमा कुंभ राशि और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा।
यह ग्रहण न सिर्फ भारत, बल्कि एशिया, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप, अफ्रीका, उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका के पूर्वी भागों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। चूंकि भारत में यह ग्रहण दिखाई देगा, इसलिए यहां इसका सूतक काल मान्य होगा।
सूतक काल की शुरुआत
चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले प्रारंभ होता है।
- ग्रहण प्रारंभ: 7 सितंबर 2025, रात 9:57 बजे
- सूतक काल प्रारंभ: उसी दिन दोपहर 12:57 बजे
- सूतक काल समाप्त: ग्रहण समाप्त होने पर, रात 1:27 बजे
इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद रहते हैं, पूजा-पाठ, खाना पकाना और शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं।
ग्रहण के समय प्रमुख चरण
- उपच्छाया प्रवेश: 08:57 PM
- ग्रहण प्रारंभ (स्पर्श): 09:57 PM
- पूर्णता प्रारंभ: 11:00 PM
- ग्रहण मध्य: 11:41 PM
- पूर्णता समाप्त: 12:23 AM
- ग्रहण समाप्त (मोक्ष): 01:27 AM
- उपच्छाया अंत: 02:27 AM
- कुल अवधि: 3 घंटे 30 मिनट
- पूर्णता अवधि: 1 घंटा 23 मिनट
पितृ पक्ष और ग्रहण का संयोग
इस बार पितृ पक्ष का आरंभ भी 7 सितंबर से हो रहा है, जो 21 सितंबर तक चलेगा। पूर्णिमा का श्राद्ध भी इसी दिन होगा, और उसी दिन यह पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा। धार्मिक मान्यता है कि पितृ पक्ष में किए गए श्राद्ध और दान-पुण्य का फल कई गुना बढ़ जाता है।
ज्योतिषीय संयोजन और प्रभाव
यह पूर्ण चंद्र ग्रहण कुंभ राशि और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में लग रहा है। इस समय:
- चंद्रमा के साथ राहु
- सप्तम भाव में सूर्य, केतु और बुध
- मीन राशि में शनि की दृष्टि
इस संयोजन से विशेषकर कुंभ राशि और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में जन्मे जातकों को सावधानी बरतने की जरूरत होगी।
किन कार्यों से बचें
ग्रहण काल में ये काम न करें—
- मूर्तियों का स्पर्श
- कैंची, सुई-धागा, धारदार वस्तुओं का प्रयोग
- यात्रा और नया कार्य प्रारंभ
- गर्भवती महिलाएं बाहर न निकलें
- ग्रहण को नंगी आंखों से न देखें
- ग्रहण के दौरान भोजन न करें
ग्रहण के संभावित शुभ-अशुभ प्रभाव
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, इस ग्रहण का प्रभाव सिर्फ धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि वैश्विक और राजनीतिक घटनाओं पर भी हो सकता है—
- संभावित नकारात्मक प्रभाव:
- दो देशों के बीच तनाव
- प्राकृतिक आपदाएं (भूकंप, तूफान, अग्निकांड)
- राजनीतिक अस्थिरता
- स्वास्थ्य समस्याओं में वृद्धि
- शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव
- संभावित सकारात्मक प्रभाव:
- शोध और खोज के क्षेत्र में प्रगति
- व्यापार में नए अवसर
- महिलाओं की पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि
- रोजगार के अवसरों में बढ़ोतरी
अशुभ असर से बचने के उपाय
ग्रहण के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए—
- हनुमान जी की पूजा और हनुमान चालीसा का पाठ
- भगवान शिव और माता दुर्गा की आराधना
- महामृत्युंजय मंत्र और दुर्गा सप्तशती का पाठ
- ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान और घर-स्थान की शुद्धि
- ताजा भोजन ग्रहण करना
- गरीबों और जरूरतमंदों को दान करना
21 सितंबर को सूर्य ग्रहण
चंद्र ग्रहण के कुछ दिनों बाद 21 सितंबर को वर्ष का दूसरा पूर्ण सूर्य ग्रहण भी लगेगा, जो भारत में दिखाई नहीं देगा। यह न्यूजीलैंड, फिजी, अंटार्कटिका और ऑस्ट्रेलिया के दक्षिणी हिस्सों में नजर आएगा, इसलिए भारत में इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा।
📌 निष्कर्ष
7 सितंबर 2025 का पूर्ण चंद्र ग्रहण खगोलीय दृष्टि से एक अद्भुत घटना है और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण भी। चूंकि यह पितृ पक्ष की शुरुआत पर पड़ रहा है, इसलिए इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। सूतक काल के नियमों का पालन, उचित पूजा-पाठ और दान-पुण्य से इसके अशुभ प्रभाव को कम किया जा सकता है।