क्या भगवान कृष्ण की भी थी तीसरी आंख?
आपने भगवान शिव की तीसरी आंख के बारे में तो सुना ही होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान कृष्ण के पास भी एक तीसरी आंख थी?
हाँ, ये ही हकीकत है! लेकिन वो अपनी तीसरी आंख कभी कभी ही खोलते थे।
पहली बार कब खोली तीसरी आंख?
ये कहानी महाभारत के युद्ध की है।
जब कर्ण और अर्जुन की भयंकर लड़ाई हो रही थी, तब कर्ण के पास एक बहुत ही खतरनाक अस्त्र था। अगर वो अस्त्र अर्जुन पर चल जाता, तो वो बच नहीं पाते।
तब भगवान कृष्ण अर्जुन के सारथी थे।
उन्होंने खतरे को समझ लिया और उसी समय अपनी तीसरी आंख खोल दी।
जब तीसरी आंख खुली तो एक तेज चमक और रोशनी चारों तरफ फैल गई।
इससे कर्ण का ध्यान भटक गया और अर्जुन ने उस समय उस पर हमला कर दिया।
अर्जुन की जान बच गई।
इस घटना से सभी योद्धा समझ गए कि कृष्ण कोई साधारण इंसान नहीं, बल्कि शाकसाथ भगवान हैं।
दूसरी बार कब खुली तीसरी आंख?
युद्ध के बाद की बात है, जब अश्वत्थामा ने एक बहुत बुरा काम किया।
उसने पांडवों के बेटों की हत्या कर दी और फिर उत्तरा के गर्भ में पल रहे परीक्षित को मारने के लिए ब्रह्मास्त्र चला दिया।
यह ब्रह्मास्त्र बहुत ही ताकतवर था, और अगर वो लग जाता तो पांडवों का पूरा वंश खत्म हो सकता था।
तब फिर से भगवान कृष्ण ने अपनी तीसरी आंख खोली।
इससे निकली दिव्य ऊर्जा ने ब्रह्मास्त्र को रोक दिया और परीक्षित की जान बच गई।
इसके बाद अश्वत्थामा को शाप मिला कि वह धरती पर हमेशा भटकता रहेगा इस लिए कहते हैं अश्वत्थामा आज भी धरती पर घूमता है।
कृष्ण हमेशा तीसरी आंख क्यों नहीं खोलते थे?
भगवान कृष्ण की तीसरी आंख में बहुत ज्यादा शक्ति थी।
अगर वो उसे हमेशा खोल कर रखते, तो उसकी रोशनी और ऊर्जा सब कुछ जला सकती थी इस वजह से कृष्ण अपनी तीसरी आंख हमेशा नहीं खोलते थे।
यह आंख ज्ञान, शक्ति और विनाश की निशानी थी।
इसलिए कृष्ण उसे जरूरत पड़ने पर ही खोलते थे।
शिव जी की तीसरी आंख की कहानियाँ
- शिव जी ने कामदेव को जलाकर भस्म कर दिया था।
- समुद्र मंथन के समय विष पीने के बाद अपनी ऊर्जा को रोकने के लिए उन्होंने तीसरी आंख का इस्तेमाल किया था।
- अंधकासुर को मारने के लिए भी उन्होंने इसी आंख से शक्ति दिखाई थी और अपनी तीसरी आंख खोली थी।
तीसरी आंख का मतलब क्या है?
तीसरी आंख का मतलब होता है:
- ज्ञान
- शक्ति
- और हर बुराई का अंत
भगवान कृष्ण और शिव दोनों ने हमें सिखाया कि बड़ी शक्ति का इस्तेमाल सोच समझ कर और अच्छे काम के लिए ही करना चाहिए।
सीख क्या मिलती है?
हमें अपनी शक्ति का घमंड नहीं करना चाहिए
सही समय पर ही उसका उपयोग करना चाहिए
बुराई के खिलाफ खड़े रहना चाहिए यह कहानी भी हमें भी यही सिखाती है
“जय श्रीकृष्ण!”
“हर आंख में शक्ति है, बस सही समय पर पहचानो तोह आप उसका अच्छा उपयोग कर सकते हो!