एंटी-रेबीज वैक्सीन, रेबीज (Rabies) एक बहुत ही खतरनाक बीमारी है। यह इंसान और जानवर, दोनों को मार सकती है।
भारत जैसे देश में हर साल लाखों लोग कुत्तों और दूसरे जानवरों के काटने से इस बीमारी के खतरे में आ जाते हैं।अब सवाल आता है अगर यह बीमारी इतनी खतरनाक है
तो सबको पहले ही एंटी–रेबीज वैक्सीन (Anti-Rabies Vaccine) क्यों नहीं दी जाती?
आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।
रेबीज क्या है?
- रेबीज एक वायरस से फैलने वाली बीमारी है।
- जो की वायरस जानवरों की लार (Saliva) में होता है।
- कुत्ता, बिल्ली, बंदर, लोमड़ी और चमगादड़ जैसे जानवर काट लें या खरोंच दें तो यह बीमारी फैल सकती है।
- एक बार रेबीज हो जाए तो बचने की संभावना बहुत कम होते है।
एंटी-रेबीज वैक्सीन क्या होती है?
- यह वैक्सीन शरीर को वायरस से लड़ने की ताकत देती है जिससे हमारा शरीर वायरस से लड़ पाए।
- अगर किसी को काटने के बाद यह वैक्सीन तुरंत दी जाए तो बीमारी रुक जाती है।
- इसीलिए डॉक्टर हमेशा कहते हैं काटने के बाद तुरंत वैक्सीन लगवाओ अगर बीमारी के लक्षण दिखने लग जाए तो बचना नामुनकिन है।
पहले से क्यों नहीं लगाई जाती?
डॉक्टरों के अनुसार इसके कई कारण हैं
1. खर्च और मुश्किलें एंटी-रेबीज वैक्सीन से
- भारत बहुत बड़ा देश है।
- सबको पहले से वैक्सीन देना बहुत महंगा पड़ेगा।
- वैक्सीन को सही तरीके से रखना और पहुंचाना भी कठिन है इस लिए ये पहले से देना मुश्किल है।
2. असर लंबे समय तक नहीं रहता
- यह वैक्सीन जिंदगीभर काम नहीं करती।
- सिर्फ कुछ साल तक ही असर करती है।
- उसके बाद बूस्टर डोज लेना पड़ता है।
- सबको बार बार देना बहुत मुश्किल और महंगा है इसी वजह से नहीं दी जाती पहले ही।
3. सिर्फ ज्यादा खतरे वाले लोग लगाए एंटी-रेबीज वैक्सीन
- यह वैक्सीन उन लोगों को पहले से दी जाती है जिनका काम जानवरों से जुड़ा है।
जैसे:- पशु-चिकित्सक (Veterinary Doctors)
- हेल्थ वर्कर
- लैब में काम करने वाले लोग
- जो लोग रोज़ाना आवारा कुत्तों या जानवरों के बीच रहते हैं उन्हें लगाई जाती है क्युकी उन्हें सबसे ज्यादा खतरा रहता है
4. WHO की गाइडलाइन
- WHO भी कहता है कि आम लोगों को यह वैक्सीन पहले से देना ज़रूरी नहीं है।
- सिर्फ ज्यादा खतरे में रहने वाले लोग इसे ले सकते हैं।
डॉक्टर क्या कहते हैं?
- अगर जागरूकता हो तो बीमारी से बचा जा सकता है।
- काटने के बाद घाव को 15 मिनट तक साबुन और पानी से धोना चाहिए।
- उसके बाद तुरंत वैक्सीन और ज़रूरत पड़े तो RIG लेना चाहिए क्योकि इलाज करना बहुत जरुरी है।
- ऐसा करने से बीमारी का खतरा लगभग 0% हो जाता है अगर ऐसा नहीं करते है तो आपके बचने के कोई उम्मीद नहीं है।
भारत में स्थिति
- WHO के अनुसार, हर साल दुनिया में लगभग 59,000 लोग रेबीज से मरते हैं।
- इनमें से 36% मौतें भारत में होती हैं।
- बच्चों और गाँवों में खतरा ज़्यादा है क्योंकि वहाँ इलाज जल्दी नहीं मिल पाता।
- सरकार लगातार जागरूकता और अस्पतालों में वैक्सीन उपलब्ध कराने पर काम कर रही है की किसी की मौत रेबीज से न हो।
निष्कर्ष
- एंटी-रेबीज वैक्सीन सबको पहले से देना संभव नहीं है।
- इसकी कीमत और असर दोनों ही सीमित हैं।
- इसे सिर्फ उन लोगों को दिया जाता है जो ज्यादा खतरे में रहते हैं।
- आम लोगों के लिए काटने के बाद तुरंत वैक्सीन लेना ही पर्याप्त है।
इसलिए अगर कभी कोई जानवर काटे, तो घाव धोकर तुरंत अस्पताल जाएं और वैक्सीन लगवाएं।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के लिए है। स्वास्थ्य समस्या होने पर हमेशा डॉक्टर की सलाह लें