आम का मौसम और सबसे बड़ा सवाल
गर्मियों में आम खाना लगभग हर किसी की पहली पसंद होती है। इसकी खुशबू, मिठास और ढेरों किस्में इसे “फलों का राजा” बनाती हैं। लेकिन डायबिटीज़ के मरीजों के मन में अक्सर एक ही सवाल रहता है—क्या हम आम खा सकते हैं?
मुंबई के डायबिटीज़ विशेषज्ञ डॉ. राहुल बख्शी बताते हैं कि जैसे ही आम का मौसम शुरू होता है, उनके कई मरीज़ यही सवाल पूछते हैं। वे मानते हैं कि आम स्वादिष्ट ज़रूर है, लेकिन इसे लेकर कई गलतफहमियाँ फैली हुई हैं।
आम को लेकर गलत धारणाएँ
- कुछ लोग मानते हैं कि डायबिटीज़ के मरीजों को आम बिल्कुल नहीं खाना चाहिए।
- वहीं, कुछ का सोचना है कि ज़्यादा आम खाने से डायबिटीज़ ठीक भी हो सकती है।
डॉ. बख्शी कहते हैं कि सच्चाई इन दोनों धारणाओं के बीच कहीं है। ज़रूरत है संतुलन की।
भारत में डायबिटीज़ की स्थिति
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार भारत में लगभग 7 करोड़ वयस्क टाइप 2 डायबिटीज़ से जूझ रहे हैं।
- इसके अलावा 5 करोड़ लोग प्रीडायबिटिक हैं यानी उनमें डायबिटीज़ होने का अधिक खतरा है।
- इंटरनेशनल डायबिटीज़ फ़ेडरेशन (IDF) के अनुसार, दुनिया भर में 90% से अधिक मामले टाइप 2 डायबिटीज़ के होते हैं।
ऐसे में आम खाना चाहिए या नहीं, यह सवाल और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
नई स्टडीज़ क्या कहती हैं?
1. यूरोपियन जर्नल ऑफ़ क्लिनिकल न्यूट्रिशन में आने वाली स्टडी
- इस रिसर्च में भारतीय आम की तीन लोकप्रिय किस्मों — सफ़ेदा, दशहरी और लंगड़ा — को टेस्ट किया गया।
- परिणाम में पाया गया कि इन आमों का ग्लाइसेमिक रिस्पॉन्स (Blood Sugar Response) व्हाइट ब्रेड से कम या बराबर है।
- यानी सीमित मात्रा में आम खाने से ब्लड शुगर उतना नहीं बढ़ता जितना रोटी या ब्रेड से बढ़ता है।
2. दिल्ली के फ़ोर्टिस सी-डीओसी में 8 हफ्ते का ट्रायल
- इस स्टडी में 35 टाइप-2 डायबिटीज़ मरीजों को नाश्ते में ब्रेड की जगह 250 ग्राम आम दिया गया।
- नतीजे बेहद सकारात्मक थे:
- ब्लड शुगर लेवल में सुधार
- HbA1c टेस्ट में बेहतर परिणाम
- इंसुलिन रेज़िस्टेंस कम हुआ
- वज़न और कमर की चौड़ाई घटी
- HDL (गुड कोलेस्ट्रॉल) बढ़ा
इससे साबित हुआ कि सीमित मात्रा में आम खाना ब्लड शुगर को नुकसान नहीं पहुँचाता, बल्कि मेटाबॉलिक हेल्थ को भी सपोर्ट करता है।
कितना आम खाना सुरक्षित है?
स्टडी के अनुसार:
- 250 ग्राम आम (लगभग 1 मध्यम आकार का आम) में 180 कैलोरीज़ होती हैं।
- अगर आपकी डेली कैलोरी ज़रूरत 1600 है, तो आम उसी लिमिट के अंदर खाना चाहिए।
- आम को डेज़र्ट की तरह नहीं बल्कि स्नैक की तरह खाएँ।
- इसे प्रोटीन या फ़ाइबर (जैसे दाल, नट्स, सलाद) के साथ लें।
- आम को जूस, मिल्कशेक या अन्य मीठी चीज़ों के साथ खाने से बचें।
डॉ. बख्शी सलाह देते हैं कि डायबिटीज़ रोगी दिन में आधा आम, दिन में एक–दो बार खा सकते हैं, बशर्ते शुगर लेवल कंट्रोल में हो।
आम का सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व
आम सिर्फ स्वाद या स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति में इसकी एक खास जगह है।
- भारत में 1,000 से अधिक किस्मों के आम पाए जाते हैं।
- उत्तर और पूर्व भारत में लंगड़ा, दशहरी, चौसा और हिमसागर लोकप्रिय हैं।
- पश्चिम भारत का अल्फ़ांसो अपनी अद्वितीय मिठास के लिए जाना जाता है।
- दक्षिण भारत की किस्मों में मीठे और खट्टे स्वाद का संतुलन मिलता है।
- मैंगो डिप्लोमेसी (Mango Diplomacy) एशियाई राजनीति में भी चर्चित रही है, जहाँ आम की टोकरी राजनयिक रिश्ते मजबूत करने का साधन बनती है।
मशहूर शायर ग़ालिब ने भी आम को “शहद का प्याला” कहा था।
निष्कर्ष
आम खाने को लेकर फैली भ्रांतियों के बीच नई स्टडीज़ राहत की खबर देती हैं। अगर डायबिटीज़ मरीज शुगर लेवल कंट्रोल में रखते हुए सीमित मात्रा में आम खाते हैं, तो यह हानिकारक नहीं बल्कि फायदेमंद भी हो सकता है।
आम न केवल स्वाद का आनंद देता है, बल्कि अब रिसर्च यह साबित कर रही है कि यह डायबिटीज़ डाइट का हिस्सा भी हो सकता है — बस शर्त है संयम और संतुलन की।