बच्चों का विकास सिर्फ पढ़ाई, खेल-कूद और खानपान पर ही निर्भर नहीं करता, बल्कि उनकी नींद भी उतनी ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कई बार माता-पिता को लगता है कि अगर बच्चा देर रात तक पढ़ाई कर ले या गेम खेल ले तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन हकीकत यह है कि नींद की कमी बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर गहरा असर डालती है।
नींद क्यों है बच्चों के लिए ज़रूरी?
- ब्रेन डेवलपमेंट – नींद के दौरान बच्चे का मस्तिष्क दिनभर सीखी गई चीज़ों को प्रोसेस करता है और नई यादें बनाता है।
- ग्रोथ हार्मोन का स्राव – बच्चों की हड्डियों और मांसपेशियों की ग्रोथ के लिए ज़िम्मेदार ग्रोथ हार्मोन गहरी नींद में ही सबसे अधिक मात्रा में रिलीज़ होते हैं।
- इम्यून सिस्टम मजबूत – पर्याप्त नींद से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
- मूड और बिहेवियर – नींद पूरी होने पर बच्चे का मूड बेहतर रहता है, चिड़चिड़ापन कम होता है।
उम्र के अनुसार नींद की ज़रूरत (वैज्ञानिक सिफारिशें)
नेशनल स्लीप फाउंडेशन और अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के मुताबिक:
| उम्र | रोजाना नींद की ज़रूरत |
| नवजात शिशु (0-3 महीने) | 14-17 घंटे (दिन + रात) |
| शिशु (4-11 महीने) | 12-15 घंटे |
| टॉडलर (1-2 साल) | 11-14 घंटे |
| प्री–स्कूल (3-5 साल) | 10-13 घंटे |
| स्कूल जाने वाले बच्चे (6-13 साल) | 9-11 घंटे |
| किशोर (14-17 साल) | 8-10 घंटे |
सोने का सही समय
- नवजात और शिशु – इनकी नींद अनियमित होती है, लेकिन धीरे-धीरे रात में ज्यादा सोने की आदत डालना जरूरी है।
- प्री-स्कूल और स्कूल जाने वाले बच्चे – रात 8:00 से 9:00 बजे के बीच सोना आदर्श है।
- किशोर – पढ़ाई और फोन की वजह से देर रात तक जागने की आदत से बचें, कोशिश करें कि 9:30 से 10:00 बजे तक सो जाएं।
नींद पूरी करने के लिए गोल्डन टिप्स
- फिक्स्ड सोने-उठने का टाइम – हर दिन एक ही समय पर सोना और उठना बॉडी क्लॉक को सेट करता है।
- स्क्रीन टाइम लिमिट करें – मोबाइल, टीवी, टैबलेट का इस्तेमाल सोने से कम से कम 1 घंटा पहले बंद कर दें।
- सोने का माहौल तैयार करें – कमरे में हल्की रोशनी, शांत वातावरण और आरामदायक बिस्तर रखें।
- शारीरिक गतिविधि ज़रूरी – दिन में खेल-कूद करने वाले बच्चों की नींद बेहतर आती है।
- सोने से पहले रिलैक्सेशन – स्टोरी सुनना, हल्का म्यूजिक या मेडिटेशन नींद लाने में मदद करता है।
अगर नींद पूरी न हो तो क्या होता है?
- पढ़ाई में ध्यान की कमी – नींद की कमी से फोकस और मेमोरी पर असर पड़ता है।
- चिड़चिड़ापन और गुस्सा – बच्चा छोटी-छोटी बातों पर भड़क सकता है।
- बीमारियां – इम्यूनिटी कमजोर होने से बार-बार सर्दी-जुकाम, बुखार हो सकता है।
- वजन बढ़ना – नींद की कमी से हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिससे मोटापे का खतरा बढ़ता है।
- मानसिक स्वास्थ्य पर असर – लंबे समय तक नींद की कमी डिप्रेशन और एंग्जायटी का कारण बन सकती है।
निष्कर्ष
बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य और उज्जवल भविष्य के लिए उनकी नींद को प्राथमिकता देना उतना ही जरूरी है, जितना उनके खाने और पढ़ाई को। सही समय पर और पर्याप्त नींद बच्चों को न केवल ऊर्जावान और खुश रखती है, बल्कि उनके ब्रेन डेवलपमेंट और शारीरिक विकास में भी अहम भूमिका निभाती है।