हिंदू संस्कृति में बड़ों के पैर छूना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि यह सम्मान, संस्कार और श्रद्धा का प्रतीक है। चाहे परिवार में हों, समाज में हों या धार्मिक स्थल पर—अपने से बड़े और श्रेष्ठजनों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेना हमारे जीवन का एक अहम हिस्सा है।
पैर छूना न केवल आभार और आदर का संकेत है, बल्कि यह सकारात्मक ऊर्जा और शुभ फल प्राप्त करने का भी माध्यम माना जाता है।
हालांकि, शास्त्रों में कुछ ऐसे लोगों के पैर छूने की मनाही है, क्योंकि ऐसा करने से पुण्य की बजाय पाप और दुर्भाग्य मिलता है।
आचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, इन परिस्थितियों में पैर नहीं छूने चाहिए—
1. पिता और बेटियां – देवी के बाल स्वरूप का सम्मान
ज्योतिष और धार्मिक मान्यता के अनुसार, पिता को अपनी बेटी, भतीजी, नातिन या पोती से पैर नहीं छुआने चाहिए।
भारतीय संस्कृति में कन्या को देवी का बाल स्वरूप माना गया है और उनके चरण स्पर्श की अनुमति देना पाप का कारण बन सकता है।
ऐसा करने से व्यक्ति के पुण्य का क्षय होता है और जीवन में आर्थिक व मानसिक परेशानियां आ सकती हैं।
2. श्मशान से लौटे व्यक्ति – अशुद्धि का नियम
सनातन धर्म में अंतिम संस्कार के बाद लौटे व्यक्ति को कुछ समय तक अशुद्ध माना जाता है।
ऐसे में उन्हें किसी का पैर नहीं छूना चाहिए और न ही किसी को उनके चरण स्पर्श करने चाहिए।
माना जाता है कि श्मशान घाट की नकारात्मक ऊर्जा का असर आशीर्वाद की शक्ति पर पड़ता है, जिससे स्वयं और दूसरों के लिए हानि हो सकती है।
3. सोए हुए व्यक्ति – आयु क्षय का कारण
वैदिक शास्त्रों के अनुसार, सोते या लेटे हुए व्यक्ति के पैर छूना उसकी आयु घटा सकता है।
कहा जाता है कि केवल मृत व्यक्ति के ही लेटे हुए अवस्था में पैर छुए जाते हैं, जैसे अंतिम संस्कार से पहले सम्मान देने हेतु।
जाग्रत और स्वस्थ व्यक्ति के चरण स्पर्श हमेशा खड़े होकर या बैठे-बैठे करने चाहिए।
4. मंदिर में – भगवान से पहले किसी और के चरण स्पर्श न करें
मंदिर में प्रवेश करने के बाद सबसे पहले भगवान को प्रणाम करना चाहिए, क्योंकि ईश्वर से बड़ा कोई नहीं है।
यदि मंदिर में भगवान से पहले किसी अन्य व्यक्ति के पैर छूए जाते हैं, तो यह ईश्वर का अपमान माना जाता है और शुभ की जगह अशुभ फल देता है।
इसलिए मंदिर में किसी का आशीर्वाद लेने से पहले भगवान के चरणों में प्रणाम करना अनिवार्य है।
5. मामा और भांजा/भांजी – पूजनीय रिश्ते का सम्मान
शास्त्रों में भांजा और भांजी को पूजनीय माना गया है।
ऐसे में उनके द्वारा मामा-मामी के पैर छूना शुभ नहीं माना जाता, क्योंकि यह रिश्ते की पवित्रता और शास्त्रीय नियम के विरुद्ध है।
कहा जाता है कि इससे मामा-मामी को पाप का भागी बनना पड़ सकता है।
पैर छूने का सही तरीका और महत्व
पैर छूते समय मन में शुद्ध भाव और सम्मान होना चाहिए।
दोनों हाथों से चरण स्पर्श कर फिर हाथों को आंखों या माथे से लगाना आशीर्वाद को ग्रहण करने का संकेत है।
यह क्रिया न केवल मानसिक शांति देती है, बल्कि बड़ों के अनुभव और सकारात्मक ऊर्जा का लाभ भी देती है।
निष्कर्ष
पैर छूना भारतीय संस्कृति का एक सुंदर हिस्सा है, लेकिन इसे आंख मूंदकर हर किसी के साथ नहीं करना चाहिए।
शास्त्रों में जिन परिस्थितियों और व्यक्तियों के लिए मनाही बताई गई है, उनका पालन करने से जीवन में सम्मान, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।