पुत्रदा एकादशी का व्रत हर वर्ष दो बार मनाया जाता है, जिनमें से एक सावन मास में और दूसरी पौष मास में आती है। यह व्रत विशेष रूप से उन दंपतियों के लिए महत्वपूर्ण होता है जो संतान की कामना रखते हैं। सावन महीने की शुक्ल पक्ष की एकादशी को यह व्रत रखा जाता है, जिसे पवित्रा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।
इस दिन भगवान लक्ष्मी नारायण की विधिपूर्वक पूजा की जाती है और व्रत रखा जाता है, जिससे संतान प्राप्ति और संतान सुख की प्राप्ति होती है। साथ ही, इस दिन भगवान शिव की पूजा का भी विशेष महत्व माना गया है, क्योंकि यह तिथि सावन मास में आती है।
📅 कब है पुत्रदा एकादशी 2025?
इस वर्ष पुत्रदा एकादशी का व्रत 5 अगस्त 2025, मंगलवार को रखा जाएगा।
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 4 अगस्त 2025 को सुबह 11:42 बजे
- एकादशी तिथि समाप्त: 5 अगस्त 2025 को दोपहर 1:13 बजे
- व्रत रखने की तिथि: 5 अगस्त 2025 (सूर्योदय के अनुसार)
इस दिन रवि योग और ज्येष्ठा नक्षत्र का संयोग रहेगा। साथ ही सुबह 4:20 से 5:02 बजे तक ब्रह्म मुहूर्त और दोपहर 12:00 से 12:54 तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा, जो पूजा-पाठ और व्रत के लिए अत्यंत शुभ माने जाते हैं।
🙏 पुत्रदा एकादशी का धार्मिक महत्व
- पुत्रदा एकादशी को लेकर धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से दंपत्तियों को संतान प्राप्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
- इस पावन तिथि पर भगवान विष्णु और शिव दोनों की कृपा प्राप्त करने का उत्तम अवसर होता है।
- जो भी भक्त इस दिन विधिपूर्वक व्रत रखते हैं, उन्हें धन–समृद्धि, सुख–शांति, और पारिवारिक कल्याण की प्राप्ति होती है।
- एकादशी का व्रत सभी प्रकार की दुख–तकलीफों और कष्टों से मुक्ति दिलाने वाला माना गया है।
🕉️ विशेष बातें
- पुत्रदा एकादशी के दिन संतान के लिए विशेष पूजा, ध्यान, और दान–पुण्य का महत्व है।
- इस दिन पीले वस्त्र पहनना, पीले फूलों से पूजा करना और भगवान विष्णु को चने की दाल का भोग लगाना शुभ माना गया है।
- व्रती को इस दिन अहिंसा का पालन, सत्य बोलना, और ब्राह्मणों को दान देना चाहिए।
✨ निष्कर्ष
पुत्रदा एकादशी सिर्फ संतान प्राप्ति के लिए नहीं, बल्कि परिवार में सुख–शांति और समृद्धि की स्थापना के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। श्रद्धा और नियम से किया गया यह व्रत भक्तों को भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का आशीर्वाद दिलाता है।