29 जुलाई 2025 (मंगलवार) को श्रद्धा और आस्था के साथ नाग पंचमी का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन भगवान शिव और नाग देवता की पूजा का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि नाग पंचमी पर पूजन से सर्प भय, ग्रह दोष और विशेष रूप से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है।
🌿 धार्मिक महत्व और परंपरा
नाग पंचमी का पर्व सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन लोग नाग देवता की पूजा कर दूध, दही, फल व मिठाई अर्पित करते हैं। पूजा के साथ-साथ व्रत और आराधना कर संकटों से छुटकारा पाने की कामना की जाती है।
डॉ. अनीष व्यास (ज्योतिषाचार्य, पाल बालाजी संस्थान) के अनुसार, यह पर्व भगवान शिव के प्रिय नागों को समर्पित होता है, जो उनके गले में शोभा पाते हैं। नागों को देवता मानकर पूजने की परंपरा पौराणिक काल से चली आ रही है।
🕉️ शुभ मुहूर्त – नाग पंचमी 2025
- पंचमी तिथि प्रारंभ: 28 जुलाई, रात 11:24 बजे
- समाप्ति: 29 जुलाई, रात 12:46 बजे
- पूजन मुहूर्त: सुबह 5:41 से 8:30 बजे तक
- चौघड़िया मुहूर्त: सुबह 10:46 से दोपहर 12:27 तक
🔱 कालसर्प दोष से मुक्ति के उपाय
- शिवलिंग पर चांदी या तांबे का नाग-नागिन जोड़ा अर्पित करें।
- ॐ नमः शिवाय या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
- सर्प गायत्री मंत्र का जप करें।
- चाहें तो त्र्यंबकेश्वर जैसे तीर्थस्थल में विशेष पूजा कराएं।
🧘♂️ पूजा विधि (Nag Panchami Puja Vidhi)
- सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
- चौकी पर नाग-नागिन की प्रतिमा स्थापित कर दूध, फूल, मिठाई आदि अर्पित करें।
- धूप-दीप से पूजन करें और आरती करें।
- कालसर्प दोष वाले जातक विशेष पूजा कर सकते हैं।
📜 धार्मिक मान्यता
मान्यता है कि नाग देवता की पूजा करने से घर में सुख-शांति, धन-धान्य और संपन्नता का वास होता है। साथ ही नागदोष या कालसर्प दोष के कारण जीवन में आने वाली बाधाएं समाप्त होती हैं।