सावन मास की कृष्ण पक्ष पंचमी तिथि को हर साल श्रद्धा और भक्ति के साथ नाग पंचमी का पर्व मनाया जाता है। इस बार यह पर्व विशेष है, क्योंकि नाग पंचमी पर कई शुभ योगों का अद्भुत संयोग बन रहा है। मान्यता है कि इस दिन नाग देवता की पूजा से कालसर्प दोष का प्रभाव कम होता है और घर में सुख–समृद्धि बनी रहती है।
🔍 नाग पंचमी 2025 में कब है?
वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि की शुरुआत 28 जुलाई की रात 11:25 बजे से होगी, और यह तिथि 29 जुलाई रात 12:47 बजे तक रहेगी।
उदय तिथि के आधार पर नाग पंचमी का पर्व 29 जुलाई 2025, मंगलवार को मनाया जाएगा।
🌟 इस बार बन रहे हैं विशेष शुभ योग
इस बार नाग पंचमी के दिन शिव योग, रवि योग और लक्ष्मी योग का संयोग बन रहा है, जो इस पर्व को और भी शुभ बनाता है।
साथ ही यह दिन मंगलवार का है, जिससे मंगला गौरी व्रत भी इसी दिन पड़ रहा है। यह दुर्लभ संयोग साधना और उपासना के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है।
🐍 नाग पंचमी का धार्मिक महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जिनकी कुंडली में कालसर्प दोष होता है, उन्हें नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा अवश्य करनी चाहिए। इससे नकारात्मक प्रभाव कम होता है और जीवन में शांति व समृद्धि आती है।
यह पर्व नागों के प्रति सम्मान, सुरक्षा और श्रद्धा का प्रतीक है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से की गई पूजा से घर में सुख–शांति और समृद्धि का वास होता है।
🕉️ नाग पंचमी की पूजा विधि
- प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर उस पर नाग देवता की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
– यदि मूर्ति उपलब्ध न हो, तो आटे से सर्प बनाकर भी पूजा की जा सकती है। - नाग देवता को दूध, जल, हल्दी, चावल, फूल, रोली, मिठाई आदि अर्पित करें।
- “ॐ नागदेवाय नमः“ मंत्र का जप करें।
- नाग पंचमी व्रत कथा का पाठ करें।
- नाग देवता का दूध से अभिषेक करें।
- अंत में दोनों हाथ जोड़कर क्षमा याचना करें।
📌 निष्कर्ष:
इस बार की नाग पंचमी विशेष योगों और मंगलवार के संयोग के कारण अत्यंत शुभ मानी जा रही है। कालसर्प दोष से मुक्ति, परिवार में सुख-शांति और समृद्धि के लिए इस दिन श्रद्धापूर्वक पूजा अवश्य करें।